अमेरिका व यूरोप के बाद अब अफ्रीका महाद्वीप में भी ईसाई धर्मावलंबियों पर इस्लामी चरमपंथियों के हमले तेज होते जा रहे हैं। मिस्र में चर्च पर हुए आत्मघाती हमले में 21 लोगों की मौत हो गई है, जबकि करीब 80 घायल हुए। इन हमलों के बाद देश में मुस्लिम-ईसाई दंगे भड़क गए हैं। इससे चिंतित पोप बेनेडिक्ट16वें ने दुनियाभर के नेताओं से ईसाइयों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है। वेटिकन सिटी में नववर्ष के मौके पर एकत्रित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पोप बेनेडिक्ट ने यह बात कही। मिस्र में ईसाइयों पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पोप ने कहा कि मानवता से बड़ा धर्म है और हमें हर हाल में इसकी रक्षा करनी होगी। दूसरी ओर मिस्र गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि यह हमला मिस्र के दूसरे सबसे बड़े शहर एलेक्जेंड्रिया के चर्च में हुआ। खाड़ी देशों में सबसे बड़ी ईसाई आबादी मिस्र में ही है। हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली, लेकिन इसके अल-कायदा की इराक शाखा का हाथ बताया जा रहा है। उसने दो महीने पहले मिस्र के ईसाइयों पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी समाचार पत्र द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, अगर इस हमले के पीछे अल कायदा के हाथ की पुष्टि होती है तो यह बहुत गंभीर बात है। अल कायदा इराक में पहले ही ईसाइयों पर हमले कर रहा है। इससे अन्य देशों में भी ईसाइयों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। जानकारों का कहना है कि मिस्र में मुस्लिम-ईसाई दंगे नई बात नहीं, लेकिन ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए आत्मघाती हमला होना बड़े खतरे का संकेत है। ऐसा लगता है कि आतंकी संगठन आधार मजबूत करने के लिए ईसाइयों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में न केवल आतंकी संगठन को बल मिलने की आशंका बढ़ गई है बल्कि प्रतिकार में ईसाइयों के भड़कने की भी संभावना है।
नववर्ष पर प्रार्थना कर लौट रहे थे लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हरे रंग की एक स्कॉडा कार मध्यरात्रि के बाद चर्च के बाहर खड़ी करके एक व्यक्ति उतरा। उतरते ही उसने शरीर से बंधे विस्फोटकों में विस्फोट कर लिया। उस वक्त चर्च में नव वर्ष की पहली प्रार्थना समाप्त हुई थी और लोग बाहर आ रहे थे। पादरी के मुताबिक प्रार्थना में करीब एक हजार लोग शामिल हुए थे। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि हमले से ईसाइयों में जबर्दस्त गुस्सा फूटा और उन्होंने पास की एक मस्जिद पर हमला कर दिया। मस्जिद के दरवाजे और खिड़की तोड़ दिए गए। फिर दोनों समुदायों जमकर टकराव हुआ। अल्पसंख्यक ईसाई इसके बाद पुलिस से भी भिड़ गए।
बीते महीनों में ईसाइयों पर हमले बढ़े
बीते कुछ महीनों में इस्लामी चरमपंथियों द्वारा मिस्र समेत नाइजीरिया, इराक और पाकिस्तान में चर्च पर हमलों की घटनाएं हुई हैं। मध्य नाइजीरिया में बीते क्रिसमस की पूर्व संध्या पर दो चर्चो पर हुए हमले हुए थे। इस हिंसा में 38 लोग मारे गए थे। दूसरी ओर 31 अक्टूबर को इराक की राजधानी बगदाद में प्रसिद्ध अवर लेडी ऑफ साल्वेशन चर्च पर आतंकवादियों के हमले में दो पादरियों और सात सुरक्षाकर्मियों के अतिरिक्त 44 ईसाई मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी खुद को इराक का अल-कायदा बताने वाले संगठन ने ली थी और जल्दी ही मिस्र के ईसाइयों पर हमले की धमकी दी थी।
नाइजीरिया में भी विस्फोट, 30 मरे
नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में सैन्य बैरकों के पास स्थित मैमी बाजार बम विस्फोट के कारण 30 लोगों की मौत हो गई। नव वर्ष की वजह से बाजार में काफी भीड़-भाड़ थी। नागरिक रक्षा कोर के प्रमुख राबी साइदू ने बताया कि शुक्रवार देर रात नामडी आजिकीवी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और न्यान्या क्षेत्र स्थित चर्च के बाहर भी विस्फोट हुए। हालांकि इन दोनों विस्फोटों में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है। हमलों के पीछे बोको हरम नाम के इस्लामिक संगठन का हाथ बताया जा रहा है। वैसे औपचारिक रूप से किसी भी आतंकवादी संगठन ने हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हमले पुलिस के अत्याचार और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रतिकार स्वरूप किए गए हैं।
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